Friday, October 4, 2019

मखौटा

परत दर परत सजे हैं मखौटे,
सिलसिलों के मुताबिक़ बने है मखौटे।

कभी तो आँसुओ से भीगे मखौटे,
कभी खिलखलती हँसी हैं मखौटे,
कभी बेअदब सी जवानी मखौटे,
कभी घूंघट की निशानी मखौटे,
गली कूचों की कहानी मखौटे,
मखौटे पहन मखौटे गिराते मखौटे,

पीढ़ियों की सीढ़ियां चढ़ते मखौटे,
जन्म से मृत्यु तक का सफर है मखौटे,
अजन्मे, अनंत, अद्धभुत हैं यह मखौटे,
किन्तु उसके दर पर न चलते मखौटे,
दुनियादारी की भीड़ का हिस्सा मखौटे,
भीड़ से बने भीड़ में गुम हो जाते मखौटे।

-निधि सहगल

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